कान छिदवाने के महत्वपूर्ण लाभ

आज के समय में लोग भले ही फैशन के लिए कान छिदवाते हों पर पुराने समय में ये एक प्रमुख संस्कार माना जाता था। लोग परम्परा की तरह इसका निर्वाहन करते थें और जैसे की सनातन धर्म की हर परम्परा के पीछे कोई ना कोई वैज्ञानिक कारण होता है इस परम्परा के पीछे भी कुछ ऐसी ही वजह रही है।
दरअसल कान के निचले हिस्से के बीच में एक्युप्रेशर का एक विशेष केन्द्र बिन्दु होता है और जब इस पर दबाव पड़ता है तो हमारे शरीर की नसें एक्टिव हो जाती है। ऐसे में कान छिदवाने से हमें कई सारे स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं और यही कारण है कि प्राचीन समय में स्त्री और पुरूष दोनो ही कान छिदवाते थें। आज हम आपको कान छिदवाने से मिलने वाले कुछ ऐसे ही स्वास्थ्य लाभ के बारे में बताने जा रहे हैं।
मानसिक विकास :- शास्त्रों के अनुसार कान के निचले हिस्से जिसे अंग्रेजी में ईयर लोब्स कहते हैं उसका केन्द्र बिन्दु मस्तिष्क के बाएं और दाएं गोलाद्र्ध से कनेक्ट होते हैं। ऐसे में जब केन्द्र बिन्दु पर छेद किये जाते हैं तो, इससे दिमाग के एक्टिव रहता हैं और मानसिक विकास सही होता है.. यही वजह है कि पुराने समय में बच्चे का कान उसी समय छिदवाया दिया जाता था जब से बच्चे का दिमाग विकसित हो रहा हो।
बौद्धिक क्षमता बढ़ती है :- कान छिदवाने से मस्तिष्क में रक्त संचार सुचारू रूप से होता है जिससे कि बौद्धिक क्षमता बढ़ती है यही वजह है प्राचीन काल में में गुरुकुल पढ़ने जाने से पहले हर बच्चे की मेधा शक्ति को बढ़ाने के लिये उसके कान छिदवाए जाते थें।
आंखों के लिए फायदेमंद :- कान के एक्यूपंक्चर केंद्रीय बिंदु पर दबाव से आंखों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है इससे आंखों की रौशनी बढ़ती है।
प्रजनन क्षमता में वृद्धी :- इयर लोब्स के प्रेशर प्वाइंट्स से प्रजनन अंगों का भी सीधा संबंध होता है.. ऐसे में कान छिदवाना प्रजनन अंगो को स्वस्थ बनाने में मददगार साबित होता है। स्त्रियों के साथ पुरूषों के लिए भी ये फायदेमंद रहता है.. इससे पुरुषों के अंडकोष को भी लाभ मिलता है।

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